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MEA: ‘हमारा विचार दोषियों पर की गई कार्रवाई पर निर्भर करता है’, जयशंकर की सुरक्षा चूक पर विदेश मंत्रालय सख्त

विदेश मंत्रालय ने विदेश मंत्री जयशंकर की यात्रा के दौरान खालिस्तानी अलगाववादियों के प्रदर्शन और उनकी सुरक्षा में सेंध लगाने की कड़ी निंदा के साथ मामले में आरोपियों पर कार्रवाई को पर सख्त रवैया अपनाया है। वहीं विदेश मंत्रालय ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि वेस्ट बैंक में काम कर रहे 10 भारतीय श्रमिकों को इस्राइल के रास्ते सुरक्षित वापस भेज दिया गया है।

विस्तार

ब्रिटेन में विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर की सुरक्षा में हुई चूक को लेकर विदेश मंत्रालय सख्त हो गया है। इस मामले में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा- भारत ने ब्रिटेन के अधिकारियों से विदेश मंत्री की यात्रा के दौरान खालिस्तानी अलगाववादियों की तरफ से सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लगाने को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। भारत ने ब्रिटेन से इस मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपील की है, साथ ही यह भी कहा कि उनकी प्रतिक्रिया इस बात पर निर्भर करेगी कि दोषियों के खिलाफ किस प्रकार की कार्रवाई की जाती है।

मामले में सख्त कार्रवाई की जाए- विदेश मंत्रालय
रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में कहा, ‘हमने ब्रिटेन के अधिकारियों से खालिस्तानी और चरमपंथी तत्वों की तरफ से सुरक्षा व्यवस्था के उल्लंघन को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है और हम चाहते हैं कि इस मामले में सख्त कार्रवाई की जाए।’ उन्होंने यह भी कहा कि इस घटना से यह साफ होता है कि ऐसे तत्वों को किस प्रकार के समर्थन या लाइसेंस दिए गए हैं और उनके आतंकित करने, धमकी देने और भारत के वैध कूटनीतिक कार्यों में बाधा डालने की कोशिशों को लेकर ब्रिटेन का रवैया लापरवाह रहा है।

‘आरोपियों पर किस प्रकार की कार्रवाई की जाती है’ 
उन्होंने कहा, ‘यह घटना सिर्फ एक सिक्के का पहलू है, जो दिखाती है कि इस प्रकार के तत्वों को किस प्रकार की स्वतंत्रता दी गई है।’ उन्होंने यह भी कहा कि ‘ब्रिटेन की विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान के बावजूद, हमारी प्रतिक्रिया इस बात पर निर्भर करेगी कि कार्रवाई किस प्रकार की जाती है।’ इससे पहले, विदेश मंत्रालय ने जयशंकर की यात्रा के दौरान खालिस्तानी अलगाववादियों के विरोध प्रदर्शन और उनकी सुरक्षा में सेंध लगाने की कड़ी निंदा की थी। भारत ने इस प्रकार की हरकतों को लोकतांत्रिक स्वतंत्रताओं के दुरुपयोग के रूप में देखा और ब्रिटेन से अपेक्षा की कि वह अपने कूटनीतिक दायित्वों को पूरी तरह से निभाए।

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